Sri Ramakrishna Nama Sankirtanam:
The 108 Names of Sri Ramakrishna

The 108 names of Sri Rama­kri­shna. The first “namanam” is com­posed by Swa­mi Vira­janan­da. The audio can be heard here.

श्रीरामकृष्ण-नाम-सङ्कीर्तनम्
नमनम्
सर्व-जीव-पाप-नाश-कारणं भवेश्वरं
स्वीकृतं च गर्भ-वास-देह-पाशमीदृशम्।
यापितं स्वलीलया च येन दिव्य-जीवनं
तं नमामि देव-देव-रामकृष्णमीश्वरम्॥
ॐ श्रीविवेकानन्दादि-सच्छिष्य-सुपूजिताय श्रीसारदादेव्याऽविरत-सेविताय श्रीरामकृष्ण-परमहंसाय अवतार-वरिष्ठाय च ते नमः॥
सङ्कीर्तनम्
जीवन-कथनम्
पर-ब्रह्म-परा-शक्ति-जगद्रूप रामकृष्ण।
धर्म-रक्षणाय जगति देह-धारि-रामकृष्ण॥ध्रु॥
१. जन्म-पूत-वङ्ग-देश-विप्र-वंश रामकृष्ण।
२. चन्द्रमणि-क्षुदीराम-सौख्य-दातृ-रामकृष्ण॥
३. शैशवेऽपि शिल्प-गीत-कला-निपुण रामकृष्ण।
४. पक्षि-पङ्क्ति-दर्शनात् समाधिमाप्त रामकृष्ण॥
५. सप्तमाब्द-लुप्त-पितृ-प्रेम-बाल रामकृष्ण।
६. बाल्य एव विरागाग्नि-दह्यमान रामकृष्ण॥
७. भूत-भुवि ध्यान-मग्न-बाल-योगि-रामकृष्ण।
८. भिक्षु-योगि-साधु-सङ्ग-मोदमान रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
९. विशालाक्षि-सद्म-पथे विस्मृतात्म-रामकृष्ण।
१०. सूत्र-धरण-काल-पालित-प्रतिज्ञ रामकृष्ण॥
११. धनी-दत्त-भिक्षयाऽति-तुष्यमाण रामकृष्ण।
१२. सूरि-सभा-राजमान-बाल-सूर्य रामकृष्ण॥
१३. शैव-रात्रि-नाटके शिवायमान रामकृष्ण।
१४. श्रीनिवास-वलयकार-पूजिताङ्घ्रि-रामकृष्ण॥
१५. सदा भक्ति-गीत-देव-पूजन-रत रामकृष्ण।
१६. कृष्ण-राग-युक्त-राधिकायमान रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
१७. लोक-शिक्षणं विहाय मोक्ष-काम रामकृष्ण।
१८. दक्षिणेश-कालिकार्चनादि-निरत रामकृष्ण॥
१९. भक्ति-हीन-रासमणिं ताडितवन् रामकृष्ण।
२०. जगन्मातृ-दर्शनाय रोरुवन् हि रामकृष्ण॥
२१. आत्म-हनन-समय-दत्त-मातृ-दृष्टि-रामकृष्ण।
२२. सर्व-काल-जगन्मातृ-दृष्टि-भरित रामकृष्ण॥
२३. शिवोन्माद-निरासाय कृतोद्वाह रामकृष्ण।
२४. विवाहे कृतेऽपि तवाचलं मनो रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
२५. भैरवेय-पाद-तले शिष्य-भूत रामकृष्ण।
२६. तन्त्र-शास्त्र-साधनेन सिद्धिमाप्त रामकृष्ण॥
२७. भक्तिमग्न-चित्त-युक्त-परम-भक्त रामकृष्ण।
२८. राम-भक्ति-विस्मृतात्म-वानर-सम रामकृष्ण॥
२९. कृष्ण-भक्ति-विस्मृतात्म-राधिकैव रामकृष्ण।
३०. तोतापुरि-विदित-वेद-शिरस्तत्त्व रामकृष्ण॥
३१. चिर-समाधि-मेरु-शिखर-दृढ-स्थान रामकृष्ण।
३२. साधन-समयेऽपि शिक्षितात्म-गुरो रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
३३. क्रैस्त-पूर्व-चित्र-धर्म-चरण-निरत रामकृष्ण।
३४. सर्व-धर्म-समानत्त्व-सत्य-दर्शि-रामकृष्ण॥
३५. एक-वस्तु-विविध-नाम-तत्त्व-दर्शि-रामकृष्ण।
३६. स्व-पत्न्यै विशुद्ध-हर्ष-बोध-दातृ-रामकृष्ण॥
३७. प्रयागादि-तीर्थ-नगर्यटन-शील रामकृष्ण।
३८. तत्र दुःखि-जनान् वीक्ष्य मोचिताश्रु-रामकृष्ण॥
३९. स्वपत्न्यामपूर्व-मातृ-दृष्टि-भर्तृ रामकृष्ण।
४०. समाधिस्थ-सारदां सुपूजितवन् रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
४१. ब्राह्म-सभ्य-केशवादि-कर्षितवन् रामकृष्ण।
४२. भक्त-सेवकागमं प्रतीक्षमाण रामकृष्ण॥
४३. साधु-शिष्य-भक्त-वृन्द-भृङ्ग-कमल रामकृष्ण।
४४. साधु-शिष्य-भक्त-हृदय-कमल-तरणि-रामकृष्ण॥
४५. नरेन्द्रादि-च्छात्र-कोटि-शिक्षमाण रामकृष्ण।
४६. भक्त-पाप-कर्षणाद्रुजयाऽऽग्रस्त रामकृष्ण॥
४७. रोग-दुःख-निर्विषण्ण-मनो-युक्त रामकृष्ण।
४८. महासमाधौ हि पर-ब्रह्म-लीन रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
गुण-कथनम्
४९. निर्विकार-निराकार-पर-ब्रह्म-रामकृष्ण।
५०. जगत्-सृष्टि-कर्तृ-पातृ-हन्तृ-देव रामकृष्ण॥
५१. तैलवत्तिलेषु जगत्यभिव्याप्त रामकृष्ण।
५२. सर्व-भूत-हृदय-देश-बुद्धि-साक्षि-रामकृष्ण
५३. साधकाद्यनुग्रहाय वपुर्धरसि रामकृष्ण।
५४. सुन्दर-तनु-दीप्त-वदन-कृपा-दृष्टि-रामकृष्ण॥
५५. सर्व-काल-मन्द-हास-रुचिर-वक्त्र रामकृष्ण।
५६. सुमनसाऽपि छेद-योग्य-मृदु-शरीर रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
५७. वेद-शास्त्र-पुराणादि-सार-वेत्तृ-रामकृष्ण।
५८. सर्व-वेद-शास्त्र-वाक्प्रमाण-कर्तृ-रामकृष्ण॥
५९. ज्ञानि-जनो यस्य पदेऽर्भकायितो रामकृष्ण।
६०. कुशल-मते तीक्ष्ण-मनाः प्राज्ञ कवे रामकृष्ण॥
६१. दीन-बन्धु-दया-सिन्धु-संश्रित-गति-रामकृष्ण।
६२. अपरि-शुद्ध-गिरिश-चन्द्र-शरणदातृ रामकृष्ण॥
६३. पुत्र-शोक-तप्त-मातृ-शान्ति-दायि-रामकृष्ण।
६४. कुष्ठ-रोगि-घोर-रुजां विनाशयसि रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
६५. मृत्सुवर्ण-समानत्व-दर्शितवन् रामकृष्ण।
६६. सर्व-दशा-कनक-काम-वर्जित-यति-रामकृष्ण॥
६७. आमरणं प्रास्खलित-ब्रह्मचर्य रामकृष्ण।
६८. निखिल-तमोऽशेष-हन्तृ-भासमान रामकृष्ण॥
६९. घनीभूत-सत्य-वयुन-हर्ष-रूप रामकृष्ण।
७०. प्रेम-रूप पूर्ण-रूप शक्ति-रूप रामकृष्ण॥
७१. सकल-कुवासना-बीज-नाशकारि-रामकृष्ण।
७२. कलुष-हरण-मधुर-धरण-भव-सुवैद्य रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
७३. सहज-नित्य-शुद्ध-बुद्ध-मुक्त-रूप रामकृष्ण।
७४. ज्ञान-योग-सिद्धिमचिरमाप भवान् रामकृष्ण॥
७५. निर्विकल्प-सिद्धिमाप्त-राज-योगि-रामकृष्ण।
७६. देव-नाम-निशाम-नादश्रुविमुग्-रामकृष्ण॥
७७. लोक-सङ्ग्रहाय सतत-कर्म-निरत रामकृष्ण।
७८. कृत्स्न-योग-सिद्धि-तुल्य-पाद-धूलि-रामकृष्ण॥
७९. योग-गम्य योगि-गम्य देव-देव रामकृष्ण।
८०. निखिल-योगि-पते योग-सिद्धि-दातृ-रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
उपदेश-कथनम्
८१. ऋक्षमहन्यदृष्टमपि भवत्येव रामकृष्ण।
८२. अज्ञ-गूढ ईश्वरोऽपि तथा भवति रामकृष्ण॥
८३. माययाऽपिहितत्वादवीक्षितस्तु रामकृष्ण।
८४. हेम-काम-गणं कुमायेति वेद्मि रामकृष्ण॥
८५. तस्य बन्धुरहङ्कार इतीरितो रामकृष्ण।
८६. भक्ति-हीन-पण्डितस्तु गृध्रसमो रामकृष्ण॥
८७. साधिकार-पुरुष एव गुरुर्भवेद् रामकृष्ण।
८८. असति जगति मग्न-जनोऽमुक्त एव रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
८९. साधु-सङ्ग-नाम-जपौ मोक्षकरौ रामकृष्ण।
९०. मलिन-वासनास्त्यजेद्धि साधनकृद् रामकृष्ण॥
९१. सस्पृहस्य मुक्ति-वचनमस्ति किं नु रामकृष्ण।
९२. आत्म-जयः स्त्रीषु मातृभाव एव रामकृष्ण॥
९३. श्रद्दधान इमां मुक्तिमचिरमाप रामकृष्ण।
९४. ईश्वरे प्रपत्तिरस्ति सुलभ-पथो रामकृष्ण॥
९५. विना शुद्ध-मलिन-विवेकेन मृगो रामकृष्ण।
९६. परानुरक्त ईश्वरे मुक्त एव रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
९७. ज्ञान-कर्म-भक्ति-पथा विमुक्तिदा रामकृष्ण।
९८. निर्गुणं च गुण-युतं च पर-ब्रह्म रामकृष्ण॥
९९. ईश्वरोऽपि याचनाद्धि पृश्निरभूद् रामकृष्ण।
१००. हरेर्नाम गृहे यस्य भयं नास्ति रामकृष्ण॥
याञ्चा-कथनम्
१०१. अनायास-मृत्युमेव यच्छ गुरो रामकृष्ण।
१०२. दैन्य-शून्य-जीवनं प्रयच्छ देव रामकृष्ण॥
१०३. क्लेश-रहितमेव मनो मे कुरुष्व रामकृष्ण।
१०४. सत्य-पूत-वचो मेऽस्तु मुखे सदा रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
१०५. अहिंसा च रक्त-गता भवतु हरे रामकृष्ण।
१०६. पुण्य-पाप-विवेकोऽपि भवेदेव रामकृष्ण॥
१०७. ब्रह्मचर्य-शक्तिरस्तु मे हि मनसि रामकृष्ण।
१०८. गृध्र-वृत्तिरपि मदीय-हृदि च मास्तु रामकृष्ण॥
१०९. मतिं देहि बलं देहि पदे स्थलं रामकृष्ण।
११०. शुद्ध-भक्तिरपि तवास्तु पदाम्बुजे रामकृष्ण॥
१११. राम एव कृष्ण एव भवानुभय रामकृष्ण।
११२. ब्रह्म-रूप शक्ति-रूप परमहंस रामकृष्ण॥ परब्रह्म ०
प्रणामः
ब्रह्मानन्दं शिवं शान्तं प्रेम-रूपं निरञ्जनम्।
योगीशमद्भुतं नित्यमखण्डाद्वैत-लक्षणम्॥
विज्ञानं त्रिगुणातीतं तुरीयाभेद-संज्ञितम्।
सुबोधं सारदं चैव विवेक-शशिभूषणम्॥
समन्वय-महाचार्यं युग-धर्म-स्वरूपिणम्।
सर्व-देव-स्वरूपं श्रीरामकृष्णं नमाम्यहम्॥
इति श्रीरामकृष्ण-नाम-सङ्कीर्तनं समाप्तम्॥

śrīrā­makṛṣṇa-nāma-saṅkīr­tanam
namanam
sar­va-jīva-pāpa-nāśa-kāraṇaṁ bhaveś­varaṁ
svīkṛ­taṁ ca garb­ha-vāsa-deha-pāśamīdṛśam |
yāpi­taṁ svalīlayā ca yena divya-jīvanaṁ
taṁ namā­mi deva-deva-rāmakṛṣṇamīś­varam ||

om śrī­vivekā­nandā­di-sac­chiṣya-supūjitāya śrīsāradādevyā’virata-sevitāya śrīrā­makṛṣṇa-parama­haṁsāya avatāra-var­iṣṭhāya ca te namaḥ ||

saṅkīr­tanam
jīvana-kathanam

para-brah­ma-parā-śak­ti-jagadrū­pa rāmakṛṣṇa |
dhar­ma-rakṣaṇāya jagati deha-dhāri-rāmakṛṣṇa ||

1. jan­ma-pūta-vaṅ­ga-deśa-vipra-vaṁśa rāmakṛṣṇa |
2. can­dra­maṇi-kṣudīrā­ma-saukhya-dātṛ-rāmakṛṣṇa ||
3. śaiśave’pi śil­pa-gīta-kalā-nipuṇa rāmakṛṣṇa |
4. pakṣi-paṅk­ti-darśanāt samād­himāp­ta rāmakṛṣṇa ||
5. sap­tamāb­da-lup­ta-pitṛ-pre­ma-bāla rāmakṛṣṇa |
6. bālya eva virāgāg­ni-dahyamā­na rāmakṛṣṇa ||
7. bhū­ta-bhu­vi dhyā­na-magna-bāla-yogi-rāmakṛṣṇa |
8. bhikṣu-yogi-sād­hu-saṅ­ga-modamā­na rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
9. viśālākṣi-sad­ma-pathe vis­mṛtāt­ma-rāmakṛṣṇa |
10. sūtra-dharaṇa-kāla-pāli­ta-prati­jña rāmakṛṣṇa ||
11. dhanī-datta-bhikṣayā’ti-tuṣyamāṇa rāmakṛṣṇa |
12. sūri-sab­hā-rājamā­na-bāla-sūrya rāmakṛṣṇa ||
13. śai­va-rātri-nāṭake śivāyamā­na rāmakṛṣṇa |
14. śrīnivāsa-valayakāra-pūjitāṅghri-rāmakṛṣṇa ||
15. sadā bhak­ti-gīta-deva-pūjana-rata rāmakṛṣṇa |
16. kṛṣṇa-rāga-yuk­ta-rād­hikāyamā­na rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
17. loka-śikṣaṇaṁ vihāya mokṣa-kāma rāmakṛṣṇa |
18. dakṣiṇeśa-kālikār­canā­di-nira­ta rāmakṛṣṇa ||
19. bhak­ti-hīna-rāsamaṇiṁ tāḍi­ta­van rāmakṛṣṇa |
20. jagan­mātṛ-darśanāya roru­van hi rāmakṛṣṇa ||
21. ātma-hanana-samaya-dat­ta-mātṛ-dṛṣṭi-rāmakṛṣṇa |
22. sar­va-kāla-jagan­mātṛ-dṛṣṭi-bhari­ta rāmakṛṣṇa ||
23. śivon­mā­da-nirāsāya kṛtod­vāha rāmakṛṣṇa |
24. vivāhe kṛte’pi tavā­calaṁ mano rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
25. bhairaveya-pāda-tale śiṣya-bhū­ta rāmakṛṣṇa |
26. tantra-śās­tra-sād­ha­ne­na sid­dhimāp­ta rāmakṛṣṇa ||
27. bhak­ti­magna-cit­ta-yuk­ta-para­ma-bhak­ta rāmakṛṣṇa |
28. rāma-bhak­ti-vis­mṛtāt­ma-vānara-sama rāmakṛṣṇa ||
29. kṛṣṇa-bhak­ti-vis­mṛtāt­ma-rād­hikai­va rāmakṛṣṇa |
30. totāpuri-vidi­ta-veda-śiras­tatt­va rāmakṛṣṇa ||
31. cira-samād­hi-meru-śikhara-dṛḍha-sthā­na rāmakṛṣṇa |
32. sādhana-samaye’pi śikṣitāt­ma-guro rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
33. kraista-pūr­va-cit­ra-dhar­ma-caraṇa-nira­ta rāmakṛṣṇa |
34. sar­va-dhar­ma-samā­natt­va-satya-darśi-rāmakṛṣṇa ||
35. eka-vas­tu-vivid­ha-nāma-tatt­va-darśi-rāmakṛṣṇa |
36. sva-pat­nyai viśud­dha-harṣa-bod­ha-dātṛ-rāmakṛṣṇa ||
37. prayāgā­di-tīrtha-nagaryaṭana-śīla rāmakṛṣṇa |
38. tatra duḥkhi-janān vīkṣya moc­itāśru-rāmakṛṣṇa ||
39. sva­p­at­nyāmapūr­va-mātṛ-dṛṣṭi-bhartṛ rāmakṛṣṇa |
40. samād­histha-sāradāṁ supūji­ta­van rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
41. brāh­ma-sab­hya-keśavā­di-karṣi­ta­van rāmakṛṣṇa |
42. bhak­ta-sevakāga­maṁ pratīkṣamāṇa rāmakṛṣṇa ||
43. sād­hu-śiṣya-bhak­ta-vṛn­da-bhṛṅ­ga-kamala rāmakṛṣṇa |
44. sād­hu-śiṣya-bhak­ta-hṛdaya-kamala-taraṇi-rāmakṛṣṇa ||
45. naren­drā­di-cchā­tra-koṭi-śikṣamāṇa rāmakṛṣṇa |
46. bhakta-pāpa-karṣaṇādrujayā”grasta rāmakṛṣṇa ||
47. roga-duḥkha-nirviṣaṇṇa-mano-yuk­ta rāmakṛṣṇa |
48. mahāsamād­hau hi para-brah­ma-līna rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
guṇa-kathanam
49. nirvikāra-nirākāra-para-brah­ma-rāmakṛṣṇa |
50. jagat-sṛṣṭi-kartṛ-pātṛ-han­tṛ-deva rāmakṛṣṇa ||
51. tailavat­tileṣu jagatyab­hivyāp­ta rāmakṛṣṇa |
52. sar­va-bhū­ta-hṛdaya-deśa-bud­dhi-sākṣi-rāmakṛṣṇa
53. sād­hakādyanu­grahāya vapur­d­ha­rasi rāmakṛṣṇa |
54. sun­dara-tanu-dīp­ta-vadana-kṛpā-dṛṣṭi-rāmakṛṣṇa ||
55. sar­va-kāla-man­da-hāsa-ruci­ra-vak­tra rāmakṛṣṇa |
56. sumanasā’pi che­da-yogya-mṛdu-śarīra rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
57. veda-śās­tra-purāṇā­di-sāra-vet­tṛ-rāmakṛṣṇa |
58. sar­va-veda-śās­tra-vākpramāṇa-kartṛ-rāmakṛṣṇa ||
59. jñāni-jano yasya pade’rbhakāyito rāmakṛṣṇa |
60. kuśala-mate tīkṣṇa-manāḥ prājña kave rāmakṛṣṇa ||
61. dīna-band­hu-dayā-sind­hu-saṁśri­ta-gati-rāmakṛṣṇa |
62. apari-śud­dha-gir­iśa-can­dra-śaraṇadātṛ rāmakṛṣṇa ||
63. putra-śoka-tap­ta-mātṛ-śān­ti-dāyi-rāmakṛṣṇa |
64. kuṣṭha-rogi-gho­ra-rujāṁ vināśayasi rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
65. mṛt­su­varṇa-samā­nat­va-darśi­ta­van rāmakṛṣṇa |
66. sar­va-daśā-kana­ka-kāma-var­ji­ta-yati-rāmakṛṣṇa ||
67. āmaraṇaṁ prāskhali­ta-brah­macarya rāmakṛṣṇa |
68. nikhila-tamo’śeṣa-hantṛ-bhāsamāna rāmakṛṣṇa ||
69. ghanīb­hū­ta-satya-vayu­na-harṣa-rūpa rāmakṛṣṇa |
70. pre­ma-rūpa pūrṇa-rūpa śak­ti-rūpa rāmakṛṣṇa ||
71. sakala-kuvāsanā-bīja-nāśakāri-rāmakṛṣṇa |
72. kaluṣa-haraṇa-mad­hu­ra-dharaṇa-bha­va-suvaidya rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
73. saha­ja-nitya-śud­dha-bud­dha-muk­ta-rūpa rāmakṛṣṇa |
74. jñā­na-yoga-sid­dhi­maci­ramā­pa bhavān rāmakṛṣṇa ||
75. nirvikalpa-sid­dhimāp­ta-rāja-yogi-rāmakṛṣṇa |
76. deva-nāma-niśā­ma-nādaśru­vimug-rāmakṛṣṇa ||
77. loka-saṅ­grahāya sata­ta-kar­ma-nira­ta rāmakṛṣṇa |
78. kṛt­sna-yoga-sid­dhi-tulya-pāda-dhūli-rāmakṛṣṇa ||
79. yoga-gamya yogi-gamya deva-deva rāmakṛṣṇa |
80. nikhi­la-yogi-pâté yoga-sid­dhi-dātṛ-rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
upadeśa-kathanam
81. ṛkṣama­hanyadṛṣṭamapi bha­vatye­va rāmakṛṣṇa |
82. ajña-gūḍha īśvaro’pi tathā bha­vati rāmakṛṣṇa ||
83. māyayā’pihitatvādavīkṣitastu rāmakṛṣṇa |
84. hema-kāma-gaṇaṁ kumāyeti ved­mi rāmakṛṣṇa ||
85. tasya band­hu­ra­haṅkāra itīri­to rāmakṛṣṇa |
86. bhak­ti-hīna-paṇḍi­tas­tu gṛdhrasamo rāmakṛṣṇa ||
87. sād­hikāra-puruṣa eva gururb­haved rāmakṛṣṇa |
88. asati jagati magna-jano’mukta eva rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
89. sād­hu-saṅ­ga-nāma-japau mokṣaka­rau rāmakṛṣṇa |
90. mali­na-vāsanāstya­jed­dhi sād­hanakṛd rāmakṛṣṇa ||
91. saspṛhasya muk­ti-vacana­masti kiṁ nu rāmakṛṣṇa |
92. ātma-jayaḥ strīṣu mātṛb­hā­va eva rāmakṛṣṇa ||
93. śrad­dad­hā­na imāṁ muk­ti­maci­ramā­pa rāmakṛṣṇa |
94. īśvare pra­p­at­ti­rasti sula­b­ha-patho rāmakṛṣṇa ||
95. vinā śud­dha-mali­na-viveke­na mṛgo rāmakṛṣṇa |
96. parānu­rak­ta īśvare muk­ta eva rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
97. jñā­na-kar­ma-bhak­ti-pathā vimuk­tidā rāmakṛṣṇa |
98. nir­guṇaṁ ca guṇa-yutaṁ ca para-brah­ma rāmakṛṣṇa ||
99. īśvaro’pi yācanād­dhi pṛśnirab­hūd rāmakṛṣṇa |
100. har­ernā­ma gṛhe yasya bhayaṁ nāsti rāmakṛṣṇa ||
yāñcā-kathanam
101. anāyāsa-mṛtyume­va yac­cha guro rāmakṛṣṇa |
102. dainya-śūnya-jīvanaṁ pray­ac­cha deva rāmakṛṣṇa ||
103. kleśa-rahi­ta­me­va mano me kuruṣ­va rāmakṛṣṇa |
104. satya-pūta-vaco me’stu mukhe sadā rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …
105. ahiṁsā ca rak­ta-gatā bha­vatu hare rāmakṛṣṇa |
106. puṇya-pāpa-viveko’pi bhavede­va rāmakṛṣṇa ||
107. brah­macarya-śak­ti­ras­tu me hi man­asi rāmakṛṣṇa |
108. gṛdhra-vṛt­ti­rapi madīya-hṛdi ca mās­tu rāmakṛṣṇa ||
109. matiṁ dehi bal­aṁ dehi pade stha­laṁ rāmakṛṣṇa |
110. śud­dha-bhak­ti­rapi tavās­tu padām­bu­je rāmakṛṣṇa ||
111. rāma eva kṛṣṇa eva bhavānub­haya rāmakṛṣṇa |
112. brah­ma-rūpa śak­ti-rūpa parama­haṁsa rāmakṛṣṇa || parabrah­ma …

praṇā­maḥ
brah­mā­nan­daṁ śivaṁ śān­taṁ pre­ma-rūpaṁ nirañ­janam |
yogīśa­madb­hutaṁ nitya­makhaṇḍād­vai­ta-lakṣaṇam ||
vijñā­naṁ triguṇātī­taṁ turīyāb­he­da-saṁjñi­tam |
sub­od­haṁ sāradaṁ cai­va vive­ka-śaśib­hūṣaṇam ||
saman­vaya-mahācāryaṁ yuga-dhar­ma-svarūpiṇam |
sar­va-deva-svarū­paṁ śrīrā­makṛṣṇaṁ namāmya­ham ||

iti śrīrā­makṛṣṇa-nāma-saṅkīr­tanaṁ samāp­tam ||